CONGRESS: केंद्र के खिलाफ दिल्ली के जंतर मंतर पर बुधवार को विरोध प्रदर्शन करेगी कांग्रेस की कर्नाटक इकाई

केंद्र में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व वाली सरकार पर हमला तेज करते हुए मुख्यमंत्री सिद्धरमैया के नेतृत्व में कर्नाटक में सत्तारूढ़ कांग्रेस पिछले कुछ वर्षों में कर अंतरण और अनुदान सहायता में राज्य के साथ “अन्याय” का आरोप लगाते हुए बुधवार को नयी दिल्ली में विरोध प्रदर्शन करेगी. आगामी लोकसभा चुनाव से पहले मंत्रियों सहित राज्य के सभी कांग्रेस विधायकों और सांसदों का विरोध प्रदर्शन कल पूर्वाह्न 11 बजे राष्ट्रीय राजधानी के जंतर-मंतर पर शुरू होगा.

प्रदर्शनकारी केंद्र से 15 वें वित्त आयोग के तहत पांच साल के दौरान कर्नाटक को हुए 1.87 लाख करोड़ रुपये के कथित नुकसान की भरपाई करने की मांग करेंगे. वहीं मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के वरिष्ठ नेता एवं केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन अपने कैबिनेट सहयोगियों के साथ 8 फरवरी को दक्षिणी राज्य के प्रति केंद्र की कथित लापरवाही के खिलाफ राष्ट्रीय राजधानी में विरोध प्रदर्शन करेंगे.

दूसरी ओर, कोलकाता में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) प्रमुख एवं पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी कथित तौर पर उनके राज्य का बकाया, विशेष रूप से महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) के तहत रोके जाने के लिए केंद्र के खिलाफ शुक्रवार को विरोध प्रदर्शन करेंगी. सिद्धरमैया ने कहा है कि विरोध प्रदर्शन का उद्देश्य राज्य की चिंताओं की ओर केंद्र सरकार और देश के लोगों का ध्यान आकर्षित करना है. उन्होंने कहा है कि अभी तक राज्य ने कभी भी दिल्ली में विरोध प्रदर्शन नहीं किया है, लेकिन “अपरिहार्य कारणों” के चलते अब ऐसा करने की स्थिति आ गई है.

उन्होंने विपक्षी भाजपा और उसके जनप्रतिनिधि, विशेष रूप से राज्य के सांसदों से कर्नाटक के हित में आंदोलन में शामिल होने का आग्रह किया, क्योंकि यह संघर्ष राज्य के साथ हुए “अन्याय” के खिलाफ है, न कि भाजपा के खिलाफ. उन्होंने भाजपा सहित कर्नाटक के सभी सांसदों को पत्र लिखकर विरोध प्रदर्शन में शामिल होने का अनुरोध किया है. उन्होंने राज्य से केंद्रीय मंत्रियों निर्मला सीतारमण (राज्यसभा सदस्य) और प्रह्लाद जोशी को भी आमंत्रित किया गया है.

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यह विरोध प्रदर्शन कांग्रेस के बेंगलुरु ग्रामीण से अपने सांसद डी के सुरेश द्वारा व्यक्त की गई चिंताओं को उचित ठहराने के प्रयासों के बीच आया है, जिन्होंने पिछले सप्ताह दावा किया था कि दक्षिण से एकत्र किए गए करों को उत्तर भारत में वितरित किया जा रहा है और दक्षिणी राज्यों को उनका उचित हिस्सा नहीं मिल रहा है. उन्होंने कहा था कि यदि ‘अन्याय’ को ठीक नहीं किया गया तो दक्षिणी राज्य एक अलग राष्ट्र की मांग करने के लिए बाध्य होंगे.

मुख्यमंत्री सिद्धरमैया ने यह स्पष्ट किया कि वह या उनकी सरकार केंद्र द्वारा “गरीब” या विकास की कमी वाले उत्तरी राज्यों को अधिक धन देने के खिलाफ नहीं हैं। उन्होंने कहा कि कर्नाटक जैसे राज्यों के साथ कोई अन्याय नहीं होना चाहिए. दिल्ली में विरोध प्रदर्शन का यह कदम ऐसे समय आया है जब कर्नाटक में सत्तारूढ़ कांग्रेस के भीतर एक वर्ग ने प्रस्ताव दिया है कि सिद्धरमैया केंद्र से संसाधनों के समान वितरण सुनिश्चित करने के लिए दक्षिणी राज्यों का एक मंच बनाने का नेतृत्व करें, जिसमें विभाज्य पूल से करों का हस्तांतरण भी शामिल है.

पार्टी और आधिकारिक सूत्रों ने कहा कि हालाकि, ऐसा प्रतीत होता है कि इस प्रस्ताव पर अभी तक कोई गंभीर चर्चा या निर्णय नहीं हुआ है, जिसका उद्देश्य संघीय ढांचे को मजबूत करना है और यह सुनिश्चित करना है कि दक्षिणी राज्यों को अपनी बात कहने का अधिकार हो. कांग्रेस सूत्रों ने कहा कि इस आंदोलन का उद्देश्य क्षेत्रीय गौरव और भाजपा के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) सरकार द्वारा राज्य के साथ “अन्याय” का मुद्दा उठाकर भाजपा का मुकाबला करना भी है.

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केंद्र सरकार पर कर्नाटक के साथ “सौतेला” व्यवहार करने और संघीय ढांचे का “अपमान” करने का आरोप लगाते हुए, सिद्धरमैया ने राज्य में भाजपा नेताओं और इसकी पिछली सरकार पर केंद्र की नीतियों के कारण राज्य के साथ हुए अन्याय को दूर करने के लिए कुछ नहीं करने के लिए बार-बार निधाना साधा है. उन्होंने कहा था कि भाजपा के 27 लोकसभा सदस्य (एक निर्दलीय और जदएस के एक सहित) उनके पक्ष में होने के बावजूद, उन्होंने संसद या सरकार के सामने अपना मुंह नहीं खोला है.

राजग सरकार में कर्नाटक का प्रतिनिधित्व करने वाले मंत्रियों ने भी राज्य की चिंताओं के बारे में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह से बात नहीं की है. हालांकि, केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण सहित भाजपा नेताओं ने इन आरोपों की कड़ी आलोचना की है कि केंद्र कर्नाटक सहित गैर-भाजपा शासित राज्यों के लिए धनराशि रोक रहा है. उन्होंने कहा है कि यह एक “राजनीतिक रूप से विकृत विमर्श” है जिसका उल्लेख “निहित स्वार्थी” तत्व करते हैं.

सीतारमण ने सोमवार को कहा, ”यह आशंका कि कुछ राज्यों के साथ भेदभाव किया जा रहा है, एक राजनीतिक रूप से विकृत विमर्श है, मुझे यह कहते हुए दुख हो रहा है कि निहित स्वार्थी तत्व ऐसा कहते हुए खुश हो रहे हैं.” उन्होंने कहा कि कोई भी केंद्रीय वित्त मंत्री वित्त आयोग की सिफ़ारिशों के साथ खिलवाड़ नहीं कर सकता है. पूर्व मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई ने कहा कि विरोध एक “राजनीतिक स्टंट” है जिसका उद्देश्य राज्य कांग्रेस सरकार की गलतियों से ध्यान भटकाना है.

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संसद में वित्त मंत्री के बयान पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए, सिद्धरमैया ने सवाल किया कि क्या वित्त आयोग की स्वायत्तता केवल “भाजपा के अधीन एक मुखौटा” है. उन्होंने कहा, ‘‘आयोग की सलाह के बावजूद, कर्नाटक के लिए विशेष अनुदान में 5,495 करोड़ रुपये की अस्वीकृति, घटती सहायता अनुदान और बजटीय धन आवंटन नहीं किया जाना, जैस अपर भद्रा परियोजना के लिए 5,300 करोड़ रुपये की राशि, से यह सवाल उठता है: क्या वित्त आयोग की स्वायत्तता भाजपा के तहत महज एक दिखावा है?’’

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