केंद्र सरकार ने सोशल मीडिया को याद दिलाई जिम्मेदारी…. …..सोशल मीडिया के लिए नए कानून की तैयारी….कंपनी को अपने प्लेटफॉर्म पर मौजूद सभी कंटेंट की जिम्मेदारी लेनी होगी

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केंद्रीय सूचना और प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने गुरुवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और इंटरनेट इस्तेमाल के दौरान जिम्मेदारी का एहसास कराया। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और वेबसाइट को किसी भी मुद्दे को स्पष्ट तरीके से लोगों के सामने रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया को ध्यान रखना चाहिए कि वो किस तरह के कंटेंट को जनरेट कर रहे हैं। मंत्री के मुताबिक पिछले कुछ दशक में टेक्नोलॉजी और इंटरनेट की दुनिया में बड़ा बदलाव आया है। ऐसे में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को इंटरनेट गवर्नेंस ढ़ांचे में मौलिक पुनर्विचार की जरूरत है।

इंडिया इंटरनेट गवर्नेंस फोरम (IIGF 2021) में बोलते हुए मंत्री ने कहा आजकल लोग मोबाइल पर ज्यादा से ज्यादा कंटेंट को पढ़ते और देखते हैं। ऐसे में अगर आपने फेसबुक और वॉट्सऐप पर कुछ लिख दिया है या फिर वीडियो पोस्ट कर दिया है, तो लोग उसे सच मानने लगते हैं। ऐसे में कंटेंट बनाने समय कुछ खास बातों का ख्याल रखना चाहिए।

कुछ भी लिखते और पढ़ते वक्त इन बातों का रखें ख्याल

मंत्री ने कहा कि युवाओं को आसानी से लिखे शब्दों पर विश्वास करने के लिए आकर्षित किया जा सकता है। लेकिन इस तरह के कंटेंट की जिम्मेदारी कौन लेगा? इसलिए कंटेंट चाहे सोशल मीडिया पर हो या फिर वेबसाइट पर इसे पूरी तरह से साफ-सुथरा होना चाहिए। उन्होंने ई-कॉमर्स बिजनेस का हवाला देते हुए कहा कि कारोबारी लिहाज से सोशल मिडाया फायदेमंद साबित हो सकता है। उन्होंने बताया कि कैसे सोशल मीडिया के जरिए ई-कॉमर्स कंपनियां पूरी दुनिया में फैल गयी। लेकिन इसके साथ जिम्मेदारी का भी भाव होना चाहिए। हमें इस बारे में सोचना चाहिए।

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साइबर सिक्योरिटी

वैष्णव ने कहा कि डिजिटल टेक्नोलॉजी और इंटरनेट अपने साथ कई सारी चुनौतियों को साथ लेकर आता है। इसमें साइबर सिक्योरिटी एक अहम मुद्दा है। यह पूरे सिस्टम को तबाह कर सकता है। ऐसे में कैसे साइबर सिक्योरिटी का सामना करना चाहिए? इसके लिए एक राष्ट्र के तौर पर हमें जिम्मेदारी से चीजों का निर्वाहन करना चाहिए। साथ ही एक फ्रेमवर्क के तहत आगे बढ़ना होगा, जिससे आने वाले दिनों मे इंटरनेट को लोगों के लिए ज्यादा फायदेमंद बनाया जा सके। तभी लोगों में इंटरनेट के इस्तेमाल को लेकर सुरक्षा का भाव आएगा।

यूरोपीय मॉडल पर आधारित हो सकता है नया कानून
एक सरकारी अधिकारी ने नाम न बताने की शर्त पर कहा कि दुनिया भर में ऐसे कई कानून हैं जो सोशल मीडिया के काम करने के तरीके को नियंत्रित करते हैं। नए नियम में अभी काफी अनिश्चितता है। यह एक अलग अधिनियम हो सकता है या एक संशोधन के तौर पर इसे पेश किया जा सकता है। सरकार नए कानून को तैयार करने के लिए यूरोपीय मॉडल पर विचार कर रही है, जिसमें दिसंबर 2020 में यूरोपीय आयोग द्वारा पेश डिजिटल सेवा अधिनियम भी शामिल है। गाइडलाइन पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन बिल पर डिपेंड करेगी।

नए आईटी नियमों से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म सतर्क
देश में फरवरी में लागू किए गए नए नियमों में दिशा-निर्देशों के साथ सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को नए शिकायत निवारण अधिकारियों को नियुक्त करने और हर महीने एक्शन टेकन रिपोर्ट जारी करने की बात कही गई है। नए IT नियम सोशल मीडिया कंपनियों को ऐसे यूजर्स से प्रोटेक्ट कर रहे हैं, जो गलत पोस्ट डालते हैं। डिजिटल सर्विस एक्ट (DSA) सोशल मीडिया यूजर्स के लिए अतिरिक्त अधिकारों की व्याख्या करता है। जैसे उन्हें गैर कानूनी कंटेंट की रिपोर्ट करने की अनुमति मिलेगी।

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अमेरिका में सोशल मीडिया को लेकर सख्त कानून
अमेरिका में फेसबुक जैसी कंपनियों पर भी वही नियम लागू हैं जो बाकी कंपनियों पर हैं। हालांकि कम्युनिकेशन को लेकर फेडरल कम्युनिकेशन कमीशन के नियम सभी माध्यमों पर लागू हैं। इसके अलावा वहां द कैलिफोर्निया कंज्यूमर प्राइवेसी एक्ट (CCPA) जैसे राज्यों के कानून भी हैं, जो यूजर डेटा कलेक्शन और उनके इस्तेमाल को रेगुलेट करते हैं। हालांकि अमेरिका में ब्रॉड लेवल पर सोशल मीडिया अभी भी सेल्फ रेगुलेशन के आधार पर संचालित हो रही है, लेकिन अदालतों में शिकायतों के दौरान इन कंपनियों की जवाबदेही तय होती है। इसलिए सेल्फ रेगुलेशन के नियम वहां काफी सख्ती से लागू भी होते हैं।

भारत सरकार 2019 से ही नियमों पर काम कर रही है
जॉइंट पार्लियामेंट्री कमेटी (JPC) 2019 से ही इस मसौदे को देख रही है। JPC की रिपोर्ट में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को पब्लिशर्स के रूप में मानने और पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन बिल में प्रस्तावित संशोधनों की धारा 35 में न्यायसंगत, निष्पक्ष, उचित और आनुपातिक की शर्त को वापस जोड़ने का प्रस्ताव है। प्रस्तावित बदलावों को पब्लिक ओपिनियन के लिए रखा जाएगा।

सोशल प्लेटफॉर्म पर यूजर्स की संतुष्टि जरूरी
सुप्रीम कोर्ट के वकील और साइबर साथी NGO के फाउंडर एनएस नप्पिनई के अनुसार, सोशल मीडिया को लेकर नया कानून महत्वपूर्ण हो सकता है। नए नियम का विचार बुरा नहीं है। सोशल मीडिया के बॉक्स पर हम विभिन्न प्रकार के बिचौलियों को क्लब नहीं कर सकते। इस प्लेटफॉर्म पर सभी तरह के मुद्दों को लेकर यूजर्स की संतुष्टि जरूरी है।

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