MAHARASHTRA: उद्धव ठाकरे ने महाराष्ट्र के नए मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे को पार्टी से किया बाहर. . . . ‘पार्टी विरोधी गतिविधियों’ का लगाया आरोप

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शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने महाराष्ट्र के नए मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे को पार्टी से निकाल दिया है।’पार्टी विरोधी गतिविधियों’ में शामिल होने का आरोप लगाकर शिंदे को शिवसेना से बाहर का रास्ता दिखाया गया है।इससे पहले शुक्रवार को पार्टी पर दावे की गहराती लड़ाई के बीच इसी आधार पर उद्धव ठाकरे ने शिंदे को शिवसेना संगठन में नेता के पद से हटाया था।गौरतलब है कि शिंदे की बगावत से ठाकरे सरकार गिरी है।

पिछले महीने अपने समर्थक विधायकों के साथ शिवसेना में बगावत करने वाले एकनाथ शिंदे भाजपा के समर्थन से 30 जून को महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री बने हैं।दरअसल, शिंदे ने शिवसेना के अधिकतर विधायकों का समर्थन जुटा लिया था, जिससे संख्याबल के मामले में ठाकरे कमजोर पड़ गए। इससे सरकार तो उनके हाथों से चली ही गई है, अब वो पार्टी से भी नियंत्रण खो सकते हैं। इसे लेकर दोनों खेमों में खींचतान जारी है।

शिवसेना में बगावत शुरू होने के बाद से ही पार्टी पर दावे को लेकर लड़ाई बढ़ती जा रही है।शिंदे ने खुद को शिवसेना का नेता बताते हुए कहा कि ठाकरे गुट के पास अब बहुमत नहीं है। हालांकि, उन्होंने खुद को कभी पार्टी प्रमुख नहीं बताया है और अभी भी तकनीकी तौर पर उद्धव ठाकरे शिवसेना के अध्यक्ष हैं।पार्टी पर दावे का संकेत भेजते हुए शिंदे ने बालासाहेब ठाकरे के साथ अपनी तस्वीर लगाई थी।

शिंदे गुट ने सुप्रीम कोर्ट में भी खुद को ‘असली शिवसेना’ घोषित किया है।शिवसेना में बगावत करने वाले विधायकों का कहना है कि शरद पवार की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी और कांग्रेस के साथ गठबंधन कर ठाकरे ने हिंदुत्व की विचारधारा को छोड़ दिया है।बागी मंत्री गुलाबराव ने ठाकरे को निशाने पर लेते हुए कहा कि उन्होंने अपनी पार्टी के 52 विधायकों को छोड़ दिया, लेकिन शरद पवार को छोड़ने के लिए तैयार नहीं हैं।

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शुक्रवार को अपनी चुप्पी तोड़ते हुए ठाकरे ने कहा था, “जिस तरीके से सरकार बनाई गई है और एक तथाकथित शिवसेना कार्यकर्ता को मुख्यमंत्री बनाया गया है, मैंने यही बात अमित शाह से कही थी। यही काम 2019 में विधानसभा चुनाव के बाद सम्मानजनक तरीके से किया जा सकता था।”उन्होंने आगे कहा, “यह मुख्यमंत्री (एकनाथ शिंदे) शिवसेना का मुख्यमंत्री नहीं है। अगर शिवसेना वहां नहीं है तो शिवसेना का मुख्यमंत्री भी नहीं हो सकता।”

अगर एकनाथ शिंदे शिवसेना के चुनाव चिन्ह ‘तीर-कमान’ पर दावा ठोंकना चाहते हैं तो उन्हें सांसद, विधायकों, पार्टी नेताओं, उपनेताओं, सचिवों, प्रवक्ताओं, मेयर, उप मेयर और विधानपरिषद के सदस्यों समेत बाकी पार्टी नेताओं में से आधे से अधिक का समर्थन चाहिए।भास्कर के अनुसार, अभी शिवसेना के पास 55 विधायक, 22 लोकसभा और राज्यसभा सांसद, 11 प्रवक्ता, 14 MLC, पांच-पांच मेयर और सचिव 19 नेता और 32 उपनेता हैं। इनके अलावा युवा सेना और महिला अघाड़ी जैसे संगठन भी हैं।

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