Coaching Centre: सरकार ने जारी की गाइडलाइन…….. अब इस उम्र से पहले नहीं होगा छोटे बच्चों का कोचिंग में एंट्री

शिक्षा कोई नया शब्द नहीं है। ऋषि मुनियों के आश्रम से लेकर अब तक शिक्षा का रूप सिर्फ बदला है। पर शिक्षा शुरू से ही शक्तिशाली रही है। दक्षिण अफ्रीका के पूर्व राष्ट्रपति नेल्सन मंडेला ने भी कहा था शिक्षा वह शक्तिशाली हथियार है, जिसका प्रयोग कर आप पूरी दुनिया को बदल सकते हैं। इसी प्रकार भारत के संविधान निर्माता भारत रत्न डॉक्टर भीमराव अंबेडकर का भी कहना था कि शिक्षा वह शेरनी का दूध है, जिसे पियेगा वही धहाड़ेगा। पर वर्तमान में शिक्षा रूपी है शेरनी का दूध कितना महंगा हो गया है इसे पीना सब के बस की बात नहीं रही।

भारत के संविधान मे 6 -14 साल तक की उम्र के सभी बच्चों के लिए अनिवार्य और निशुल्क की शिक्षा देने की व्यवस्था की गई है। इस दिशा में सन् 2002 में 86वाँ संविधान संशोधन अधिनियम पारित किया गया। इससे देश के हर बच्चे को शिक्षा प्राप्त करने का मूलभूत अधिकार प्राप्त हो गया। इससे शिक्षा के प्रति जहाँ लोगों में नई चेतना जाग्रत हुई, वहीं पर राज्यों को प्रत्येक बच्चे को शिक्षा देना अनिवार्य हो गया है। पर इसी बीच देश में कुकुरमुत्ता की तरह कोचिंग सेंटर्स का प्रचलन बढ़ गया। इतना ही नहीं इन कोचिंग सेंटर्स ने लोगों का स्कूली शिक्षा से भी भरोसा उठ दिया।

जब बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए कोचिंग सेंटर्स नहीं बल्कि स्कूलिंग शिक्षा सबसे ज्यादा जरूरी है। प्रतिस्पर्धा की होड़ में अभिभावक भी इन कोचिंग सेंटर्स की चाल में ऐसे फस जाते हैं की छोटी उम्र में ही अपने बच्चों को उनके हवाले कर देते हैं। कामयाब होने के लिए अभिभावक अपने बच्चों को कोचिंग सेंटर्स में भेज तो देते हैं लेकिन स्कूलों में जो साइकोलॉजी आफ टीचिंग एंड लर्निंग के माध्यम से जो शिक्षा मिलती है वह शिक्षक कोचिंग सेंटर में कभी भी नहीं मिल पाती।

इसे भी पढ़ें:  CHHATTISGARH: राशन कार्ड का नवीनीकरण कराना हुआ अनिवार्य, जानें प्रोसेस

प्राइवेट कोंचिंग सेंटर्स की मनमानी पर अब केंद्र सरकार ने लगाम कसने की तैयारी कर ली है। इन नई गाइडलाइंस के अनुसार अब कोई भी कहीं भी और कभी भी प्राइवेट कोचिंग सेंटर नहीं खोल पाएगा. इसके लिए सबसे पहले उसे रजिस्ट्रेशन कराना होगा. यही नहीं अब कोचिंग सेंटर में 16 साल से कम उम्र के बच्चों को पढ़ाई के लिए नामांकन नहीं होगा. कोचिंग सेंटर किसी छात्र से मनमानी फीस भी नहीं वसूल सकेंगे.

बढ़ते सुसाइड मामलों के कारण लिया फैसला

केंद्र ने ये गाइलाइन देश भर में ठएएळ या खएए की तैयारी कर रहे छात्रों के बढ़ते सुसाइड मामलों और देश में बेलगाम कोचिंग सेंटर्स की मनमानी को लेकर दिया है। गाइडलाइन के अनुसार, आईआईटी जेईई, एमबीबीएस, नीट जैसे प्रोफेशनल कोर्स के लिए कोचिंग सेंटरों के पास फायर और भवन सुरक्षा संबंधी एनओसी होनी चाहिए। परीक्षा और सफलता के दबाव को लेकर छात्रों की परेशानी दूर करने के लिए उन्हें मनोवैज्ञानिक और मानसिक स्वास्थ्य संबंधी सहायता भी उपलब्ध कराई जाए।

पहले भी जारी हो चुकी हैं गाइडलाइंस

कोचिंग सेंटर के रजिस्ट्रेशन और रेगुलेशन 2024 के दिशानिर्देश राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को पहले ही भेजे गए हैं. कुछ राज्यों में पहले से ही कोचिंग इंस्टीट्यूट्स के रेगुलेशन संबंधी कानून हैं, अधिक फीस वसूलने वाले और जगह-जगह खुले प्राइवेट कोचिंग सेंटरों की बढ़ती तादाद और वहां सुसाइड के बढ़ते मामलों के बीच केंद्र सरकार ने ये मॉडल गाइडलाइन जारी की है।

ताकि कम हो मानसिक दबाव

गाइडलाइन में कहा गया है कि छात्रों पर कड़ी प्रतिस्पर्धा और अकादमिक दबाव को देखते हुए कोचिंग केंद्रों को बच्चों की भलाई के लिए जरूरी कदम उठाने चाहिए। कोचिंग संस्थान तनाव और अवसाद से छात्रों को बचाने और उन्हें मानसिक स्वास्थ्य संबंधी मदद अनुभवी मनोवैज्ञानिकों की सहायता लेनी होगी.

इसे भी पढ़ें:  AMBIKAPUR: राशन कार्ड का नवीनीकरण शुरू, नवीनीकरण हेतु राशनकार्डधारियों द्वारा आवेदन करने की तिथि 15 फरवरी तक........ समस्त राशन कार्ड धारक निर्धारित समय सीमा में करायें अपने कार्ड का नवीनीकरण

नियम तोड़ा तो लगेगा तगड़ा जुर्माना

कोचिंग सेंटर्स को गाइडलाइन के अनुरूप रजिस्ट्रेशन न कराने और नियम और शर्तों के उल्लंघन पर भारी जुर्माना देना होगा. कोचिंग सेंटर पहले उल्लंघन के लिए 25 हजार, दूसरी बार एक लाख और तीसरी बार अपराध के लिए रजिस्ट्रेशन कैंसल करने के साथ भारी जुर्माना के लिए तैयार रहना होगा।

अब 10 दिन के भीतर वापस होगी फीस

गाइडलाइन के मुताबिक, कोर्स की अवधि के दौरान फीस नहीं बढ़ाई जा सकेगी. किसी छात्र ने पूरा भुगतान करने के बावजूद कोर्स को बीच में छोड़ने का आवेदन किया है तो पाठ्यक्रम की शेष अवधि का पैसा वापस करना होगा. रिफंड में हॉस्टल और मेस फीस भी शामिल होगी।

5 घंटे से ज्यादा क्लास नहीं चलेगी

किसी भी हालात में स्कूलों या संस्थानों में पढ़ने वाले छात्रों की टाइमिंग के दौरान कोचिंग कक्षाएं नहीं चलेंगी। एक दिन में 5 घंटे से अधिक कक्षाएं नहीं चलेंगी. सुबह अर्ली मार्निंग और लेट नाइट क्लास नहीं होंगी। छात्रों और शिक्षकों को वीक ऑफ मिलेगा। त्योहारों में कोचिंग सेंटर छात्रों को परिवार के साथ जुड़ने और भावनात्मक लगाव को बढ़ाने का मौका देंगे।

16 साल से छोटे बच्चों का नहीं होगा नामांकन

केंद्र द्वारा जारी कोचिंग सेंटर विनियमन 2024 के लिए प्रस्तावित दिशानिर्देश सुझाव देते हैं कि 16 वर्ष से कम उम्र के छात्रों को कोचिंग सेंटरों में नामांकित नहीं किया जाना चाहिए। दिशानिर्देश यह भी सुझाव देते हैं कि कोचिंग सेंटरों को माता-पिता और छात्रों से भ्रामक वादे या रैंक की गारंटी नहीं देनी चाहिए।

ट्यूटर की योग्यता पर भी ध्यान

गाइडलाइन में प्रस्तावित है कि स्नातक से कम योग्यता वाले ट्यूटर्स को कोचिंग संस्थानों में पढ़ाने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। उचित निगरानी सुनिश्चित करने के लिए केंद्र ने ऐसे दिशानिर्देश लागू होने के तीन महीने के भीतर नए और मौजूदा कोचिंग सेंटरों के पंजीकरण का प्रस्ताव दिया है। लेकिन सबसे बड़ी बात यह है कि अधिकतर कोचिंग सेंटर्स का अभी तक कहीं भी रजिस्ट्रेशन ही नहीं है। इनमें होने वाली पढ़ाई व किसी भी घटना के लिए आखिर जिम्मेदार किसे बनाया जाए सरकार के सामने सबसे बड़ी चिंता की बात यह है।

इसे भी पढ़ें:  CHHATTISGARH: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के भय मुक्त शासन देने के वादे और अपराध के प्रति जीरो टालरेंस की नीति पर चलते हुए की गई प्रशासनिक कार्रवाई

क्या आपने इसे पढ़ा:

error: Content is protected !!